Bhiwani News | पराली जलाने पर होगी कार्रवाई : कृषि यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी | ₹1200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने आगामी खरीफ और रबी सीजन को देखते हुए किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से उनका प्रबंधन करने की अपील की है। सहायक कृषि इंजीनियर नसीब धनखड़ ने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि यंत्रों पर अनुदान देने के साथ फसल अवशेष नहीं जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
नसीब धनखड़ ने बताया कि सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन और क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट योजनाओं के तहत आधुनिक कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। उनके अनुसार भिवानी जिले में इन योजनाओं के तहत हर साल करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसान निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन अधिक होने की स्थिति में उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय कमेटी ड्रॉ के माध्यम से लाभार्थियों का चयन करेगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया और भौतिक सत्यापन पूरा होने पर अनुदान राशि जारी की जाएगी।
कृषि अधिकारी के अनुसार धान की कटाई के बाद फसल अवशेष नहीं जलाने वाले किसानों को विभाग की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण होना जरूरी बताया गया है।

नसीब धनखड़ ने बताया कि 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले धान कटाई सीजन को देखते हुए पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था तैयार की जा रही है। प्रत्येक गांव में 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात करने की योजना है। इसके अलावा संबंधित टीमें भी निगरानी करेंगी।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं की सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जाएगी। किसी स्थान पर ऐसी घटना की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारी को मौके पर भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नसीब धनखड़ के अनुसार पराली जलाने के मामले में नियमानुसार एफआईआर, आर्थिक जुर्माना और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री जैसी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि रेड एंट्री होने की स्थिति में संबंधित किसान को अगले दो वर्षों तक सरकारी मंडी में फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने किसानों से पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है और किसान सरकारी अनुदान योजनाओं का लाभ भी उठा सकते हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों से समय रहते योजनाओं की जानकारी लेकर आवेदन करने और पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि उपकरणों का उपयोग करने का आह्वान किया है।
Editor: शिवानी राजपूत



