Kurukshetra News | दशहरे को लेकर गरमाई सियासत : सुभाष सुधा ने अशोक अरोड़ा पर लगाया आरोप | अरोड़ा बोले-परंपरा बदलने के विवाद में लिया फैसला

कुरुक्षेत्र में दशहरा एक जगह मनाने या अलग-अलग आयोजन करने को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा के पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा पर अलग दशहरा मनाने का फैसला लेने का आरोप लगाया है। सोमवार को पंचायत भवन में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान सुधा ने कहा कि दशहरा भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है, इसलिए इसका आयोजन भी मिलकर होना चाहिए।
सुभाष सुधा ने कहा कि दशहरा आयोजन को लेकर अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं। उनका कहना है कि इन बैठकों में उन्होंने कुरुक्षेत्र में एक ही स्थान पर दशहरा आयोजित करने की बात रखी थी। सुधा के अनुसार, शहर में करीब 20 वर्षों से एक ही स्थान पर दशहरा मनाया जाता रहा है, लेकिन अब अलग बैठक कर अलग दशहरा मनाने का फैसला किया गया है।
पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि विवाद की एक बड़ी वजह मंच और बैठने की व्यवस्था को लेकर सामने आई। उन्होंने आरोप लगाया कि दशहरा कार्यक्रम के दौरान विपक्ष से जुड़े लोग मंच पर आकर बैठ जाते थे, जबकि उनके साथ आने वाले कार्यकर्ताओं को खड़े रहना पड़ता था। सुधा के अनुसार, इससे कार्यक्रम के दौरान तनाव की स्थिति बनती थी।

सुधा ने कहा कि उन्होंने इस विवाद को खत्म करने के लिए दो मंच बनाने का सुझाव दिया था, ताकि दोनों पक्षों को उचित स्थान मिल सके और आयोजन भी एक साथ किया जा सके। हालांकि, इस सुझाव पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद अलग-अलग दशहरा मनाने का फैसला सामने आया।
पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि दशहरा सभी को मिलकर मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में राजनीति प्रवेश कर जाती है तो इस तरह की स्थिति पैदा होती है। सुधा ने कार्यकर्ताओं से भी दशहरे के पर्व को भाईचारे और सामाजिक एकता के साथ मनाने की बात कही।
वहीं, विधायक अशोक अरोड़ा की ओर से पहले हुई बैठक के बाद अलग दशहरा आयोजन को लेकर अपनी बात रखी गई थी। अरोड़ा के अनुसार, कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी में स्थानीय विधायक को मुख्य अतिथि बनाए जाने की परंपरा रही है, लेकिन पिछले दो वर्षों से इस परंपरा को बदलने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, इसी विवाद के चलते अलग आयोजन करने का फैसला लिया गया।
अशोक अरोड़ा ने कहा कि दशहरा किसी एक व्यक्ति, जाति या वर्ग का पर्व नहीं है, बल्कि सभी समाज के लोगों का पर्व है। उन्होंने कहा कि नए आयोजन में सभी वर्गों और समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आयोजन को व्यापक स्तर पर करने की बात भी कही गई है।
अरोड़ा के अनुसार, नए आयोजन के तहत भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। नई कमेटी की ओर से ब्रह्मसरोवर के पास स्थित मेला ग्राउंड में दशहरा उत्सव आयोजित करने की बात कही गई है।
दशहरे के आयोजन को लेकर सामने आए दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि मामला अब धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा एक स्थान पर दशहरा मनाने की पैरवी कर रहे हैं, वहीं विधायक अशोक अरोड़ा अलग आयोजन को परंपरा से जुड़े विवाद का परिणाम बता रहे हैं। अब देखना होगा कि दोनों आयोजनों की तैयारियां किस तरह आगे बढ़ती हैं और शहर में दशहरे का पर्व किस स्वरूप में मनाया जाता है।
Editor: शिवानी राजपूत



