Jhunjhunu News | दो महीने भी नहीं चली मेहाड़ा-मावंडा सड़क : 5 साल की गारंटी पर सवाल | जगह-जगह बने गड्ढे

मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई मेहाड़ा-मावंडा सड़क निर्माण के शुरुआती समय में ही खराब होने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और कई स्थानों पर ऊपरी सतह उखड़ने लगी है। पांच साल की गारंटी अवधि वाली सड़क की ऐसी स्थिति को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
मेहाड़ा गांव के पास मुख्य सड़क के बीच बना गहरा गड्ढा वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार गड्ढा दूर से स्पष्ट दिखाई नहीं देता, जिससे वाहन चालकों को अचानक इससे बचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का दावा है कि यहां कई दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। रात के समय खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मेहाड़ा-मावंडा मार्ग पर केवल एक स्थान पर ही समस्या नहीं है। कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ रही है और गड्ढे बनने शुरू हो गए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण के समय भी सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायतें रखी गई थीं। अब ग्रामीण पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

मौके पर लगाए गए निर्माण बोर्ड के अनुसार मावंडा से मेहाड़ा तक SH-13A के सुदृढ़ीकरण का यह कार्य 11 किलोमीटर लंबा है। बोर्ड पर कार्य की स्वीकृत राशि 1100 लाख रुपये यानी 11 करोड़ रुपये और कार्यादेश राशि 797.74 लाख रुपये दर्ज है। कार्य प्रारंभ होने की तारीख 2 जनवरी 2025 और कार्य समाप्ति की तारीख 1 नवंबर 2025 अंकित है। सड़क की गारंटी अवधि पांच वर्ष दर्शाई गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क पांच वर्ष की गारंटी अवधि में है तो निर्माण के शुरुआती दौर में ही इसके खराब होने की वजह क्या है। उनका दावा है कि सड़क दो महीने भी ठीक स्थिति में नहीं रह सकी और अलग-अलग स्थानों पर टूटने लगी। ग्रामीणों ने संबंधित एजेंसी और विभाग से गारंटी की शर्तों के तहत सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।
इस मार्ग पर भारी वाहनों और डंपरों की आवाजाही भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर ओवरलोड डंपर लगातार गुजरते हैं, जिससे सड़क पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से ओवरलोड वाहनों की जांच कर नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने की मांग की है।

मेहाड़ा और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह मार्ग रोजमर्रा के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। विद्यार्थी, किसान, ग्रामीण और अन्य वाहन चालक नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क के बीच बने गड्ढों से दुर्घटना का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मेहाड़ा-मावंडा मार्ग की तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने और पांच साल की गारंटी अवधि के तहत खराब हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही मेहाड़ा के पास बने गहरे गड्ढे को तत्काल भरने और मार्ग पर कथित ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर कार्रवाई की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से तैयार सड़क यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही खराब हो रही है तो इसकी वजह सामने आनी चाहिए। उन्होंने जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए जल्द कदम उठाने की मांग की है।
इस मामले में संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। उनका पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Editor: State Desk



