Narnaul News | 10 हजार के भत्ते पर आक्रोश : विद्यार्थी धरने पर | बाकी जगह ज्यादा राशि | लिखित आश्वासन पर अड़े

बाबा खेतनाथ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षण भत्ता (स्टाइपेंड) बढ़ाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। विद्यार्थी कॉलेज प्रांगण में धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि इंटर्नशिप यानी प्रशिक्षण अवधि में उन्हें महज 10 हजार रुपये प्रतिमाह प्रशिक्षण भत्ता दिया जा रहा है, जबकि बाकी जगह यह राशि 20 से 25 हजार रुपये और कई स्थानों पर करीब 30 हजार रुपये तक है। विद्यार्थियों का सवाल है कि जब प्रशिक्षण की जिम्मेदारियां निभानी हैं तो प्रशिक्षण भत्ते में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
विद्यार्थियों ने हरियाणा में एमबीबीएस विद्यार्थियों को करीब 24 हजार रुपये प्रशिक्षण भत्ता मिलने का हवाला देते हुए कहा कि उनके लिए महज 10 हजार रुपये की राशि न्यायसंगत नहीं है। इसी असमानता को दूर करने की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रशासन को मांग पत्र सौंपा है। उनकी मांग है कि प्रशिक्षण भत्ते को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।

धरने पर बैठे विद्यार्थियों का कहना है कि यह केवल कुछ हजार रुपये बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि उनके प्रशिक्षण और मेहनत के उचित मूल्य का सवाल है। महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये का प्रशिक्षण भत्ता बेहद कम है। उनका कहना है कि सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार कर जल्द फैसला लेना चाहिए।
खास बात यह है कि महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य एवं आयुष मंत्री आरती सिंह राव का गृह जिला है और उसी जिले में विद्यार्थी प्रशिक्षण भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि अब केवल मौखिक भरोसा पर्याप्त नहीं है। जब तक मंत्री की ओर से उनकी मांग पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

वहीं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट श्रीनिवास ने बताया कि विद्यार्थियों की ओर से दिया गया मांग पत्र सरकार को भेज दिया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित कक्षाओं में हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मांग सरकार तक पहुंच चुकी है और इसके समाधान के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अनुसार फाइनल ईयर के विद्यार्थियों की परीक्षाओं में अभी काफी समय है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रशासन और सरकार को कुछ समय देना चाहिए, ताकि मामले में कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि सीधे धरने पर बैठना समाधान नहीं है और विद्यार्थियों को अपनी नियमित कक्षाएं जारी रखनी चाहिए।

फिलहाल एक तरफ विद्यार्थी 10 हजार रुपये के प्रशिक्षण भत्ते को बढ़ाने और लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन मांग पत्र सरकार तक पहुंचाने की बात कहकर विद्यार्थियों से कक्षाओं में लौटने की अपील कर रहा है। अब नजर सरकार के फैसले पर है कि विद्यार्थियों की मांग पर कब और क्या निर्णय लिया जाता है।
Editor: शिवानी राजपूत



