Ateli News | राता कला में खुले बिजली तार बने मोरों के लिए खतरा : करंट की चपेट में आने से मौत का दावा | कई बार शिकायत के बाद भी समस्या बरकरार

गांव राता कला में बिजली लाइन के खुले तार राष्ट्रीय पक्षी मोरों के लिए खतरा बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खुले बिजली तारों की चपेट में आने से कई बार मोरों की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में रोष है और उन्होंने बिजली विभाग से खुले तारों को हटाकर उनकी जगह केबल डालने की मांग की है।
सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र उर्फ वेदू ने बताया कि गांव में खुले बिजली तारों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस संबंध में संबंधित विभाग को लिखित शिकायत देकर कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि पहले गांव में कई स्थानों पर खुले बिजली तार लगे हुए थे। इन तारों की चपेट में आने से राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत होने की घटनाएं सामने आती रहती थीं। ग्रामीणों की मांग के बाद कुछ स्थानों पर खुले तारों की जगह केबल डलवाई गई, जिससे वहां स्थिति में सुधार हुआ था।
सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार जिन स्थानों पर अभी भी खुले तार हैं, वहां खतरा बना हुआ है। उनका दावा है कि इन तारों की चपेट में आने से मोरों की मौत का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों में राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि खुले बिजली तार केवल पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य जीवों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे में समस्या का जल्द समाधान किया जाना जरूरी है।
सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र उर्फ वेदू ने बिजली विभाग से गांव में खुले बिजली तारों का निरीक्षण करवाने और जहां आवश्यकता हो वहां खुले तार हटाकर केबल डालने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे राष्ट्रीय पक्षी मोरों को बिजली तारों की चपेट में आने से बचाने के साथ भविष्य में संभावित हादसों को भी रोका जा सकेगा।
ग्रामीणों ने विभाग से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व में जिन स्थानों पर केबल डाली गई थी, वहां समस्या कम हुई थी। इसी तरह शेष स्थानों पर भी सुरक्षित बिजली लाइन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
फिलहाल ग्रामीणों और सरपंच प्रतिनिधि की ओर से समस्या तथा पूर्व में शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। मामले में बिजली विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
Editor: गरिमा बागोतिया



