Kurukshetra News | गगनजोत संधू का अंतिम संस्कार : बेटे आफताब ने दी मुखाग्नि | अंतिम यात्रा में उमड़े लोग

हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री एवं पिहोवा से चार बार विधायक रहे स्व. जसविंदर सिंह संधू के बेटे गगनजोत संधू का शनिवार को उनके पैतृक गांव गुमथला गढ़ू में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार, रिश्तेदारों, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। गगनजोत के बड़े बेटे आफताब ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनका छोटा बेटा जोरावर स्पेन में पढ़ाई कर रहा है और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।
गगनजोत संधू के निधन की सूचना के बाद से ही गुमथला गढ़ू में शोक का माहौल था। शनिवार को अंतिम यात्रा में थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, शाहाबाद विधायक रामकरण काला, पिहोवा विधायक मंजीत चट्ठा और नगर पालिका अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों के लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के बाद गांव के गुरुद्वारे में अरदास की गई।

गगनजोत संधू की शुक्रवार को पंजाब के रोपड़ जिले के पखराली गांव स्थित उनके फार्म हाउस पर मौत हो गई थी। शुरुआती जानकारी में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया है। घटना के बाद पंजाब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की थी। पुलिस मौत से जुड़ी परिस्थितियों और इसके पीछे के कारणों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में घरेलू विवाद से जुड़ा पहलू सामने आया है। हालांकि विवाद किस बात को लेकर था और मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

गगनजोत संधू का परिवार लंबे समय से पिहोवा क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता स्व. जसविंदर सिंह संधू पिहोवा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और हरियाणा सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। जनवरी 2019 में बीमारी के कारण उनके निधन के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले चेहरों में गगनजोत संधू का नाम प्रमुखता से लिया जाता था।
गगनजोत ने भी राजनीति में सक्रियता दिखाई। वह पहले इनेलो से जुड़े और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चा हुई थी। हालांकि बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी संधू परिवार राजनीतिक चर्चा में रहा। उस समय गगनजोत और उनके बड़े भाई जसतेज सिंह संधू के चुनाव मैदान में उतरने को लेकर चर्चाएं चली थीं, लेकिन अंततः दोनों ने चुनाव नहीं लड़ा।
राजनीति के साथ गगनजोत संधू गांव की पंचायत व्यवस्था में भी सक्रिय रहे। वह गुमथला गढ़ू के दो बार सरपंच रहे। सरपंच के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान गांव में तकनीक आधारित सुविधाओं को बढ़ावा देने की पहल की गई।
वर्ष 2016 में गुमथला गढ़ू में वाई-फाई हॉटस्पॉट सुविधा शुरू की गई थी। डिजिटल पंचायत से जुड़ी पहलों के कारण उस समय गांव को हाईटेक पंचायत के रूप में पहचान मिली। गांव के विकास और पंचायत स्तर पर तकनीक के उपयोग से जुड़ी इन पहलों के कारण गगनजोत स्थानीय स्तर पर भी चर्चित रहे।
गगनजोत संधू अपने पीछे पत्नी सिमरनजीत कौर और दो बेटों को छोड़ गए हैं। शनिवार को उनके अंतिम संस्कार के दौरान परिवार को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में लोग गुमथला गढ़ू पहुंचे। उनके निधन से परिवार के साथ पिहोवा और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है।
Editor: शिवानी राजपूत



