Faridabad News | मानी मांगों के पत्र जारी करने से खत्म होगी हड़ताल-सुभाष लांबा : बर्खास्तगी और गिरफ्तारी का किया विरोध | CM से हस्तक्षेप की मांग

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने पालिका और अग्निशमन कर्मचारियों की चल रही हड़ताल को लेकर सरकार की कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत कर्मचारी नेताओं की बर्खास्तगी, निलंबन और कर्मचारियों की गिरफ्तारी से हड़ताल समाप्त नहीं होगी। सरकार को बातचीत के दौरान स्वीकार की गई मांगों को लागू करने के आदेश जारी करने चाहिए और मुख्यमंत्री को मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
सुभाष लांबा ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल 6 अगस्त से चल रही है। उनका दावा है कि 13 मई को शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल की अध्यक्षता में सरकार और नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के बीच हुई बैठक में कई मांगों पर सहमति बनी थी। सरकार को उन मांगों को लागू करने के लिए आवश्यक पत्र जारी करने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सहमत मांगों को लागू करने के बजाय आंदोलनरत कर्मचारी नेताओं के खिलाफ बर्खास्तगी और निलंबन जैसी कार्रवाई कर रही है तथा हड़ताली कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। लांबा ने इन कार्रवाइयों की निंदा करते हुए सरकार से कार्रवाई का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए विवाद का समाधान करने की मांग की।
सुभाष लांबा ने सरकार के उस पक्ष पर भी सवाल उठाया, जिसमें कर्मचारियों की अधिकांश मांगें स्वीकार किए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से 13 में से 12 मांगें मान लिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कर्मचारी संगठन इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि जिन मांगों पर सहमति बनी है, सरकार उनके क्रियान्वयन से संबंधित लिखित आदेश जारी करे।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी हड़ताल के कारण शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध को जल्द समाप्त करना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मामले में सीधे हस्तक्षेप कर 13 मई के समझौते को लागू करवाने और हड़ताल समाप्त कराने की पहल करने की मांग की।
लांबा ने ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस मांग में कानूनी और तकनीकी अड़चन होने की बात कही गई है, जबकि कर्मचारी संगठन इससे सहमत नहीं है। उन्होंने विधानसभा में कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के बयान का उल्लेख करते हुए दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके ठेका कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण नीति बनाने की मांग की।
सुभाष लांबा ने दावा किया कि हरियाणा में मई 2014 में नियमितीकरण से संबंधित नीतियां बनाई गई थीं और उनके तहत हजारों कर्मचारियों को नियमित किया गया था। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार पूर्व नीतियों और न्यायिक निर्णयों का अध्ययन कर उसी आधार पर नई नीति तैयार कर सकती है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश की एक नीति का उदाहरण देते हुए भी सरकार से ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की नीतियों और अदालतों के फैसलों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार को कानूनी रूप से उचित रास्ता निकालना चाहिए।
लांबा ने सर्वोच्च न्यायालय और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए सरकार से ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कानूनी पहलुओं की समीक्षा करते हुए सरकार कर्मचारियों की मांग का समाधान निकाल सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार बातचीत और सहमत मांगों को लागू करने के बजाय अनुशासनात्मक कार्रवाई पर जोर देती रही तो कर्मचारी आंदोलन और लंबा खिंच सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेकर ही मौजूदा गतिरोध समाप्त किया जा सकता है।
सुभाष लांबा की ओर से सरकार के समझौते, नियमितीकरण नीतियों और न्यायालय के फैसलों को लेकर किए गए दावे उनके बयान पर आधारित हैं। इन दावों पर सरकार का पक्ष इस समाचार के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है।
Editor: शिवानी राजपूत



