Bhiwani News | किसानों ने मांगों को लेकर खोला मोर्चा : भिवानी को सूखाग्रस्त घोषित कर मुआवजा देने की मांग | बाजरे की MSP पर सरकारी खरीद शुरू करने की उठाई आवाज

किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को भिवानी में किसान संगठनों ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना दिया। जम्हूरी किसान सभा हरियाणा के बैनर तले किसानों ने लघु सचिवालय के समक्ष धरना देकर नारेबाजी की और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार के नाम सौंपा। किसान नेताओं ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राकेश आर्य और किसान नेता आजाद मिराण ने कहा कि उनके अनुसार भिवानी जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, लेकिन अभी तक जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की कि जिले में विशेष गिरदावरी करवाकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही पिछले वर्ष जलभराव से हुए नुकसान का लंबित मुआवजा भी किसानों के खातों में जल्द जारी करने की मांग उठाई।

बिजली टॉवरों से जुड़े विवाद का मुद्दा उठाते हुए किसान नेताओं ने कहा कि तोशाम और सिवानी क्षेत्र में किसानों का धरना लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पावर ग्रिड और एचवीपीएनएल के अधिकारी किसानों से जुड़े मामले में प्रशासन और सरकार को गुमराह कर रहे हैं। किसान नेताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और जिला प्रशासन से इस विवाद का जल्द समाधान कराने की मांग की।
बाजरे की सरकारी खरीद को लेकर भी किसानों ने सरकार पर निशाना साधा। किसान नेताओं का कहना था कि किसान नहरी और ट्यूबवेल के पानी से किसी तरह बाजरे की फसल तैयार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी खरीद की तारीख अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष एमएसपी घोषित होने के बावजूद सरकारी खरीद नहीं हुई और भावांतर भरपाई योजना के माध्यम से किसानों को राहत देने की बात कही गई।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 20 सितंबर तक बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई तो सिरसा से रेवाड़ी और नूंह-तावड़ू तक के किसानों को एकजुट कर भिवानी में बड़ी महापंचायत बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया जाएगा।
किसान नेताओं ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने दावा किया कि इससे देश की कृषि, किसानों और मंडी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना था कि पंजाब और हरियाणा में मंडी व्यवस्था अभी मजबूत है और किसानों को आशंका है कि इसे कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
किसान नेताओं ने बीजों के पेटेंट और कृषि क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी नीतियों से परंपरागत बीज व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बिजली संशोधन बिल 2025 को लेकर भी उन्होंने कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सस्ती बिजली पर संभावित प्रभाव की आशंका जताई और इसका विरोध किया।

किसान नेताओं ने बताया कि किसान एकजुटता को मजबूत करने के लिए पंजाब के जालंधर में एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी है। उनके अनुसार इसमें जम्हूरी किसान सभा और अखिल भारतीय किसान महासभा के एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन में कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों से जुड़े कृषि मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तय करने की बात कही गई।
धरने के दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और ज्ञापन के माध्यम से सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस दौरान किसान नेता राकेश आर्य, आजाद मिराण सहित अन्य किसान नेता और संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
Editor: गरिमा बागोतिया



