Narnaul News | मनुमुक्त ‘मानव’ की स्मृति में साहित्य-कला संगम : ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ का विमोचन | 99 हरियाणवी लघुकथाएं संकलित

भारतीय पुलिस सेवा के दिवंगत अधिकारी डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ की 13वीं पुण्यतिथि पर नारनौल में ‘हरियाणवी साहित्य-कला संगम’ का आयोजन किया गया। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट नारनौल और हरियाणा कला परिषद् कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में हूडा सेक्टर स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र ‘मनुमुक्त भवन’ में आयोजित समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से दो दर्जन से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। इस दौरान हरियाणवी लघुकथाओं पर आधारित पुस्तक ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उद्योग विस्तार अधिकारी डॉ. सुनील भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना गीत से हुआ। समारोह ट्रस्ट के चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ के सानिध्य में आयोजित किया गया, जबकि संचालन डॉ. पंकज गौड़ ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी राजस्थान के कुलपति एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार गर्ग ने की।

हरियाणा कला परिषद् के उपाध्यक्ष महेश जोशी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे, जबकि सोनीपत के वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् पद्मश्री डॉ. संतराम देशवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मंचस्थ अतिथियों ने दिवंगत डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृति में ट्रस्ट की ओर से किए जा रहे साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों की सराहना की।
ट्रस्टी डॉ. कांता भारती ने बताया कि डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ की 13वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण हरियाणवी बोली में तैयार लघुकथा-संकलन ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ का विमोचन रहा।
पुस्तक का संपादन भिवानी के साहित्यकार एवं स्तंभकार डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ ने किया है। पुस्तक डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ को समर्पित की गई है। आयोजकों के अनुसार यह हरियाणवी बोली का पहला लघुकथा-संकलन है।
‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ में कुल 33 लघुकथाकारों की रचनाओं को स्थान दिया गया है। प्रत्येक लेखक की तीन-तीन लघुकथाएं शामिल होने से पुस्तक में कुल 99 हरियाणवी लघुकथाओं का संकलन किया गया है। इसमें भारत के साथ विदेश में रह रहे रचनाकार की रचनाएं भी शामिल की गई हैं।
आयोजकों के मुताबिक संकलन में ऑकलैंड, न्यूजीलैंड के एक लघुकथाकार के अलावा हरियाणा के 27, राजस्थान के तीन तथा चंडीगढ़ और पंजाब के एक-एक लघुकथाकार की रचनाएं शामिल हैं। इस तरह पुस्तक में हरियाणवी भाषा और क्षेत्रीय साहित्य से जुड़े अलग-अलग स्थानों के रचनाकारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक विमोचन के बाद ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ पर साहित्यिक समीक्षा भी प्रस्तुत की गई। तोशाम के सुशील कुमार ‘नवीन’ और रेवाड़ी के सत्यवीर नाहड़िया ने पुस्तक की विषयवस्तु और हरियाणवी लघुकथा साहित्य में इसके महत्व पर अपनी समीक्षाएं प्रस्तुत कीं।
समारोह के दूसरे चरण को काव्य-पाठ के लिए समर्पित किया गया। इसमें जैतपुर के संजय पाठक, अलवर के प्रवेंद्र पंडित, सोनीपत की प्रो. ज्योति राज, गुरुग्राम के राजपाल यादव ‘राज’, रेवाड़ी के डॉ. मुकुट अग्रवाल और दलबीर सिंह ‘फूल’ तथा नारनौल के डॉ. जितेंद्र भारद्वाज और ओशिन शुक्ला ‘साक्षी’ सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
करीब ढाई घंटे चले समारोह में साहित्य, संस्कृति और हरियाणवी भाषा को लेकर अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की गईं। काव्य-पाठ के साथ साहित्यकारों ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की, जिसका उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने स्वागत किया।
कार्यक्रम के समापन पर मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से समारोह के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि सहित सहभागी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र प्रदान कर ‘डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ स्मृति-सम्मान’ से नवाजा गया।
समारोह में करनाल के कृष्ण कुमार ‘निर्माण’, सोनीपत की डॉ. राजकला देशवाल, गुरुग्राम के डॉ. सुरेश वशिष्ठ और कृष्णा जैमिनी, झज्जर के राजपाल सिंह गुलिया, रेवाड़ी के भूप सिंह भारती, डॉ. धर्मवीर यादव और सविता ‘अरुणा’, फतेहाबाद के अमरचंद बैनीवाल, हिसार के डॉ. सत्यपाल शर्मा और अशोक वशिष्ठ तथा सिवानी मंडी के भूपेंद्र गोदारा और सुमन गोदारा सहित अनेक साहित्यकार मौजूद रहे।
इसके अलावा टोरंटो, कनाडा के हरमहेंद्र यादव, सिंघानिया विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. पवन त्रिपाठी, मुख्य वित्त अधिकारी सुनील कुमार सोबती और संजीव ग्रोवर, दादरी के भूजल अधिकारी राकेश कुमार, नारनौल के सीएमजीजीए प्रखर सचान, पूर्व एजीएम अमरजीत यादव और पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी मुकेश कुमार सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, सुरेशचंद शर्मा, बनवारीलाल शर्मा, कृष्ण कुमार शर्मा, बलदेव सिंह चहल, मोहम्मद शफी, सत्यवीर चौधरी, डॉ. पुष्पलता भारद्वाज, डॉ. शर्मिला यादव और डॉ. वंदना कुमारी सहित साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की।
आयोजकों ने कहा कि डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ की स्मृति में साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को आगे भी जारी रखा जाएगा। समारोह के माध्यम से एक ओर दिवंगत साहित्य एवं समाजसेवी व्यक्तित्व को याद किया गया, वहीं हरियाणवी भाषा के साहित्य को प्रोत्साहित करने और नए रचनात्मक कार्यों को मंच देने का प्रयास भी किया गया।



