Yamunanagar News | पीड़ितों को समय पर मिले न्याय : गंभीर मामलों की त्वरित जांच | तकनीक से जुटाएं साक्ष्य

उपायुक्त प्रीति ने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों और अन्य गंभीर मामलों की जांच से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय में कार्रवाई पूरी की जाए। पुलिस चालान समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को नियमानुसार समय पर न्याय और सहायता मिले।
उपायुक्त प्रीति डीसी कार्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में चिन्हित अपराधों के साथ पोक्सो एक्ट, हत्या, बलात्कार, महिलाओं से छेड़छाड़ और महिलाओं के विरुद्ध अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की स्थिति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों से मामलों की प्रगति की जानकारी लेते हुए लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की।
उपायुक्त ने कहा कि पोक्सो एक्ट से जुड़े मामलों पर गंभीरता से कार्य किया जाए, ताकि जांच और कानूनी प्रक्रिया प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सके। उन्होंने अधिकारियों को वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामलों की जांच करने तथा तथ्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जाएं।
बैठक में पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को गंभीर एवं चिन्हित अपराधों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए। विशेष रूप से चैन स्नैचिंग, मोबाइल स्नैचिंग और अन्य घटनाओं में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करते हुए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाए।
पुलिस अधिकारियों को प्रत्येक मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से और निर्धारित समयावधि में पूरी करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि दोषियों के विरुद्ध न्यायालय में मजबूत पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके। अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की सक्रियता के साथ तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल भी जरूरी बताया गया।
बैठक के दौरान विभिन्न मामलों से संबंधित अधिवक्ताओं और जांच अधिकारियों ने मामलों की मौजूदा प्रगति से उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया। उपायुक्त ने लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए।
उपायुक्त ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के अंतर्गत 42 पीड़ितों को कुल 33 लाख 7 हजार 500 रुपये की राहत राशि प्रदान की गई है। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि पात्र पीड़ितों को नियमानुसार मिलने वाली सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि पीड़ितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करवाना प्रशासन और पुलिस की प्राथमिकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ कानून का प्रभावी पालन कराना भी जरूरी है।
बैठक में डीएसपी कंवलजीत सिंह, जिला जेल अधीक्षक सत्येन्द्र कुमार, जिला न्यायवादी कर्मवीर राठी, जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय के अधीक्षक, डीआईपीआरओ डॉ. मनोज कुमार, संबंधित मामलों के अधिवक्ता, जांच अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



