Yamunanagar News | ऑटो म्यूटेशन से आसान होंगी सेवाएं : 11 दिन की समय-सीमा | ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

उपायुक्त प्रीति ने बताया कि राज्य सरकार राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू कर रही है। इसका उद्देश्य केवल इंतकाल की प्रक्रिया में बदलाव करना नहीं, बल्कि नागरिकों को बार-बार तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और पूरी राजस्व व्यवस्था में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
डीसी प्रीति ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ेगी। शुरुआती चार दिन म्यूटेशन पटवारी के लॉगिन में रहेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए उसे चार दिन का समय मिलेगा। इस अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर पांचवें दिन म्यूटेशन स्वतः कानूनगो के लॉगिन में फॉरवर्ड हो जाएगी।
कानूनगो को आवश्यक कार्रवाई के लिए दो दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद सातवें दिन म्यूटेशन स्वतः सीआरओ के लॉगिन में पहुंच जाएगी। सीआरओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए चार दिन का समय निर्धारित किया गया है। इस तरह प्रक्रिया को किसी एक स्तर पर लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने की व्यवस्था की जा रही है।
उपायुक्त ने बताया कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 11वें दिन म्यूटेशन स्वतः जमाबंदी में शामिल हो जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय करने के साथ म्यूटेशन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है, ताकि आम नागरिक को इंतकाल के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
डीसी प्रीति के अनुसार सरकार नागरिकों के लिए म्यूटेशन से संबंधित विशेष ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था भी शुरू करेगी। इसके तहत निर्धारित समय-सीमा में म्यूटेशन प्रोसेस नहीं होने पर संबंधित नागरिक ऑनलाइन पेज या पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेगा। नागरिक अपनी म्यूटेशन से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी ऑनलाइन जमा कर सकेगा।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग या अधिकारी को 10 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। यदि नियमों के अनुसार म्यूटेशन की जा सकती है तो नागरिक को उसकी कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे नागरिक को अपने मामले की स्थिति और उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी कारण से म्यूटेशन नहीं हो सकती तो संबंधित सीआरओ द्वारा स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा। इसमें स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि म्यूटेशन किस कारण से नहीं हो सकती और किन नियमों के आधार पर मामला स्वीकार नहीं किया गया। आवश्यकता होने पर आगे अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी।
डीसी ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी नागरिक को केवल यह कहकर वापस न भेजा जाए कि इंतकाल नहीं हो सकता। उसे संबंधित मामले में लिखित और तर्कसंगत निर्णय दिया जाए, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके।
उन्होंने बताया कि सरकार अधिक से अधिक राजस्व सेवाओं को डिजिटल माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाने पर काम कर रही है। प्रयास है कि नागरिकों को ये सुविधाएं घर बैठे अथवा नजदीकी सीएससी के माध्यम से उपलब्ध हों। इसके तहत जमाबंदी, म्यूटेशन, डिजिटल हस्ताक्षरित रजिस्ट्री तथा अन्य राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने, छोटी त्रुटियों में सुधार की प्रक्रिया को सरल बनाने और तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे राजस्व संबंधी काम में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डीसी प्रीति ने बताया कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटाइजेशन का उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना, जवाबदेही तय करना और नागरिकों को समय पर सेवा देना है।
नई व्यवस्था के शुरुआती चरण में किसी अधिकारी या कर्मचारी को वास्तविक तकनीकी समस्या या संचालन संबंधी परेशानी आती है अथवा कोई सकारात्मक सुझाव है तो उसे उचित माध्यम से विभाग के संज्ञान में लाया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य राजस्व सेवाओं में कम मानवीय हस्तक्षेप, अधिक पारदर्शिता और निर्धारित समय में नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध कराना है।



