Kurukshetra News | जानो गीता, मानो गीता’ कार्यशाला आयोजित : जीवनोपयोगी संदेशों पर हुआ मंथन | आचरण में उतारने का आह्वान

कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के सान्निध्य में गीता ज्ञान संस्थानम् के सभागार में जीओ गीता के तत्वावधान में एक दिवसीय ‘जानो गीता, मानो गीता’ कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक, नैतिक और व्यावहारिक संदेशों को दैनिक जीवन से जोड़ने पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी ज्ञानानन्द महाराज और उपस्थित विद्वान वक्ताओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जीओ गीता के उपाध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने स्वामी ज्ञानानन्द महाराज का स्वागत किया और प्रतिभागियों को संस्था के उद्देश्यों व गतिविधियों की जानकारी दी।

प्रथम सत्र में गीता की पृष्ठभूमि पर चर्चा हुई। स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने ‘क्यों पढ़ें भगवद्गीता’ विषय पर मार्गदर्शन करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को कर्तव्य, विवेक, आत्मसंयम, सकारात्मक चिंतन और लोककल्याण की दिशा दिखाती है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में गीता के अध्ययन और मनन की उपयोगिता पर भी विचार रखे।
सेवानिवृत्त आईएएस एवं जीओ गीता की संस्थापक सदस्य डॉ. सुमेधा कटारिया ने महाभारत युद्ध के कारण और कुरुक्षेत्र के वर्णन पर विचार रखे। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकान्त गुप्ता ने गीता और विश्व समुदाय के संदर्भ में विचार, चरित्र और जीवन-मूल्यों पर चर्चा की।
जीएमएन कॉलेज अंबाला कैंट के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने युद्धभूमि में दिए गए गीता के संदेश को वर्तमान जीवन की परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि तनाव और दुविधा के समय भी गीता धैर्य, विवेक और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। सत्र के अंत में स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
दूसरे सत्र में भगवद्गीता के परिचय और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. तजिंदर शर्मा ने गीता के नामकरण, अध्याय परिचय और महिमा के बारे में जानकारी दी। सेवानिवृत्त आईएएस एवं जीओ गीता उत्तर प्रदेश के संयोजक मणि प्रसाद मिश्र ने गीता के पात्रों और उनसे मिलने वाली प्रेरणा पर विचार रखे। डॉ. विवेक कोहली ने गीता के प्रमुख प्रेरणा सूत्रों को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया।
तीसरे सत्र में कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग पर चर्चा की गई। डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने तीनों योग के व्यावहारिक पक्ष को समझाते हुए इन्हें जीवन प्रबंधन और सकारात्मक सोच से जोड़ने पर जोर दिया।
चौथा सत्र ‘गीता यात्रा’ को समर्पित रहा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा की डॉ. आरती गौड़ ने गीता और समता के संबंध पर विचार रखे। वक्ताओं ने प्रतिभागियों से गीता के संदेश को केवल अध्ययन तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन और आचरण में अपनाने का आह्वान किया।
Editor: नितिन यादव



